Mother
Mother, who is mother? God, helper? No one has the answer of this question. But I think she is one who loves me a lot, takes care of me and she is one who makes her child big and a successful person.
I have troubled her a lot, I would shout at her and make faces at her. But I realized my mistake and felt very bad and I told her that I was sorry. That very moment she smiled and forgave me. Such is the unconditional love of a mother.
-By Pushkar Wagh, IV B

 

Follow your dreams.
Don’t listen to the things they say,
They say that you’re not good enough.
They say you cannot do a thing,
And loads of other horrible stuff.
Listen to your heart,
That is exactly the thing,
You must do.
It’s a good start.
Don’t listen to them,
Don’t hear what they say,
You’re a precious gem,
So make your own way.
So the moral of your story;
Your life belongs only to you,
Don’t waste your time on worry,
Just start doing something new.
Just follow your dreams.    Daniel Gracias,  9 A

Your Light in Darkness
life is a series of challenges. There are ‘ups’ and then there are ‘downs’. Everyday we face a new difficulty. Life throws at us a new challenge everyday. These challenges make our life a battle. A battle that you fight until you die. And on multiple occasions, we want to give up. We feel like we cannot fight anymore. We just want it to end. We blame these problems on destiny, on people around us. Even on ourselves. But what we do not realize is that, these challenges make us better human beings. They make us stronger. These battles we are fighting, we’ll only fight them once. These challenges make life worth living. But we should realize that there are no challenges we can’t face. No mistake we cannot repent for. And these problems; we are the ones who will solve them. No one else can solve them for us. Every once in a while, we will need someone to lean on, someone to motivate us, someone to cheer us up. But in the end, we have to face our challenge. We will have to be our light in darkness. You will have to be your light in darkness.    -Harshad Manglani

Advantages and disadvantages of technology
In today’s day and age, technology has become one of the most important aspect of human life and has become a necessity in the eyes of many people. But as every coin has two sides, technology also has its pros as well as cons. Technology includes machines such as computers, smartphones, television, things like internet and many more. All these things have been created to make this world a better, smarter and overall safer place. Computers paired with the internet are man’s greatest source of knowledge which can even surpass those of many books. Also many informative videos, documentaries and articles can be found on any topic in the world. With the invention of the smartphones all this information is just at our fingertips. But technology has many disadvantages also. Due to the anonymity created by the internet security policies, people think they can behave in any manner and can get away with it. People become extreme introvert and lazy as many services have now become available at our doorstep such as food delivery, e-shopping and also online chatting is available in the comfort of our chairs. People start or even posting pictures, etc and start giving these more importance to these than their actual life.
Thus we must learn to control our habits and stay in moderation of what we do. Also we must be vigilant in seeing that cyber bullying and other such acts do not occur. Hence, we see that technology has advantages as well as numerous disadvantages as well.      – Sridhar Himane, XI A

स्वतंत्रता दिवस पर कुछ शब्द
 नमस्कार! माननीय प्रधानाचार्य, अध्यापक गण और मेरे प्यारे मित्रों, आज, स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व के इस शुभ अवसर पर, मैं इस पाठशाला, मेरे परिवार और वैयक्तिक तौर पर आप सबको शुभकामनाएँ प्रस्तुत करता हूँ। मेरी हार्दिक इच्छा है, अपितु अपेक्षा है कि हमारा देश, यह भारतभूमि अनंतकाल तक स्वतंत्र, सार्वभौम और खुशहाल बनी रहे। मित्रों! यह स्वतंत्रता कोई मुफ्त की उपज नहीं, यह याद रखें। इस आजादी का सपना संजोए कई वीरों ने और उनके परिवारों ने असीमित बलिदान किए हैं। इस महान उद्देश्य पूर्तिहेतू कई माँओं ने अपने पुत्र, अनेक बहनों ने अपने भाई और असंख्य पत्नियों ने अपने सुहाग न्योछावर किए। हरिसिंह नलवा, सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, लोकमान्य टिळक, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ऐसे अनेक क्रांतिकारियों ने अपनी जानें गंवाई या फिर जेल की सलाखों के पीछे अपने वैयक्तिक जीवन का संपूर्ण बलिदान दे दिया। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरु और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे अहिंसावादीयों ने इस देश को भले ही आजादी दिलाई हो परंतु उन निःस्वार्थ और देशभक्ति से प्रेरित दिवानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज ही के दिन, १९४७ में, हमने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़कर आजादी की ओर पहला कदम रखा। पिछले ६९ वर्षों में भारत में कई महान कार्य हुए और अतुलनीय प्रगति हुई।
भारत एक कृषि प्रधान और औद्योगिक देश के रुप में विकसनशील है। पिछले दो दशकों में भारतीय सॉफ्टवेअर अभियंताओं ने अपनी सफलता का झंडा पूरे विश्व में फहराया है।  आज भारतीय मूल के लोग लगभग हर देश में दिखाई देते हैं। अमरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में तो भारतीय लोगों की संख्या बड़ी मात्रा में है। इस विकास और प्रगति को देखकर मन खुश होता है और सिर गर्व से उठता है किंतु वहीं दूसरी ओर भारत में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी और आतंकवाद को देख कर मन चिंतित हो जाता है। भारत सरकार ने इस स्थिति को पूरी तरह बदलने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। दोस्तों! आजादी अपने साथ कई जिम्मेदारियाँ लेकर आती है। हम सभी को काफी मूलभूत अधिकार प्राप्त हैं लेकिन वहीं संविधान में कर्तव्यों का भी उल्लेख है। हमें अपने कर्तव्यों से मुँह नहीं मोडना चाहिए। हमें अपना काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करना होगा। भ्रष्टाचार से तो दूर रहना बहुत जरूरी है। हमें अपनी बात से दूसरों को भी प्रेरित करना होगा कि हमारी एक गलती से, हमारे एक गलत कदम से समस्त देश का नुकसान ना हो जाए। इस दिन हम संकल्प करें कि हम अपना घर, आसपास का मोहल्ला और अपनी पाठशाला को साफ-सुथरा रखें। स्वच्छंद होकर कूड़ा-कचरा यहाँ-वहाँ फैलाना भी इस आजादी का अपमान है। भाषा, धर्म, रंग और जात-पात के आधार पर भेदभाव ना करें। सभी भारतीय भाई-बहन हैं इसे याद रखें और सभी का इस आजादी पर समान अधिकार है इसे एक क्षण भी भूलना नहीं चाहिए। हम सब युवा वर्ग नए कपड़े पहनते हैं, नई गाड़ियाँ चलाते हैं और नए उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं और आर्थिक आजादी को ही सच्ची आजादी समझ बैठे हैं। हमें यह भूलना नहीं चाहिए की १५ अगस्त की छुट्टी है सिर्फ मनोरंजन और सैर सपाटा करने के लिए नहीं। इस दिन हम प्रण लें कि हम किसी गरीब की मदद करें, किसी भूखे को खाना दे, किसी बेघर को छत दिलवाएँ और आजादी की सच्ची भावना को समझकर देश की विभिन्न सेवाओं में अपना योगदान दें। भारत की गरिमा और भारत के सम्मान को अपने से भी बढ़कर समझें और देश का परचम पूरी दुनिया में प्रस्थापित करें।
मित्रों! स्वतंत्रता का अर्थ केवल सामाजिक या आर्थिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि एक वचन का भी निर्वाह है कि हम सब अच्छे, सच्चे और ईमानदार नागरिक बनें और देश को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाएँ। आओ! हमारे पूर्वजों के बलिदानों का स्मरण करते हुए भारतमाता का जयघोष पूरे मन से करें। भारत माता की जय! जय हिंद! वंदे मातरम!                                                                                                               -आदित्य काखंडकी, Std: X A